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Doordarshan Kendra Thiruvananthapuram | Wednesday, 11 December 2019
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दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम
दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम

दूरदर्शन केंन्द्र, तिरुवनंतपुरम दुनिया की सबसे बडी टेलिविशन श्रृंखला डी.डी.भारत का अंग है ।  दूरदर्शन केंन्द्र, तिरुवनंतपुरम 35 भू-स्थलीय ट्रान्समीटरों और 3 प्रोडक्शन केंन्द्रों के सहारे केरल, लक्षद्वीप और माही प्रदेशों की सेवा करता है । दूरदर्शन केंन्द्र, तिरुवनंतपुरम का उद्घाटन 1 जनवरी 1985 को केरल राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री के.करुणाकरन ने किया था, जो आजकल प्रति सप्ताह 168 घंटे मलयालम कार्यक्रमों का निर्माण एवं प्रसारण करता है ।  केरल में 27 ट्रान्समीटर, लक्षद्वीप में 7 और माही में 1 ट्रान्समीटर से कार्यक्रमों का प्रसारण होता है ।  अब केरल, लक्षद्वीप और माही में 35 अरब जनसंख्या का 90 प्रतिशत से अधिक लोग इन भू-स्थलीय ट्रान्समीटरों की श्रृंखला के माध्यम से दूरदर्शन केंन्द्र, तिरुवनंतपुरम के कार्यक्रम प्राप्त करते हैं ।  डी.टी.एच. की प्रस्तुति के बाद , शत प्रतिशत जनसंख्या बिना केबल कनेक्शन के दूरदर्शन केंन्द्र, तिरुवनंतपुरम काकार्यक्रम प्राप्त कर सकते हैं ।  प्रादेशिक विविधताओं को संजोए रखने के लिए  दूरदर्शन के स्टुडियो तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और कालिकट में स्थापित हैं ।  पूरे भारत की जनता दूरदर्शन के मलयालम कार्यक्रम देखती है ।  एशिया, आफ्रिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अमेरिका महाद्वीपों के 64 देशों में भी दूरदर्शन के मलयालम कार्यक्रम प्राप्त हैं । 

 केरल में टी.वी. की. रूपरेखा- वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार केरल में 65,95,206 (6.6 मिलियन) परिवार हैं ।  74.9 प्रतिशत (49, 42,550) ग्रामीण क्षेत्र में और 25.1  प्रतिशत (16,52,656) शहरीय क्षेत्रों में हैं ।  2001 में 38.8 प्रतिशत परिवारों के पास टी.वी.सेट (25,60,686) था ।  इनमें 62.3 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के हैं और 37.7 प्रतिशत नगर क्षेत्र के ।  पूरे देश में ग्रामीण क्षेत्र में सबसे अधिक टी.वी.के स्वामित्व वाला राज्य केरल ही है ।  अगर हम प्रतिवर्ष 10-15 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाये तो केरल के टी.वी. युक्त परिवारों की कुल संख्या 40 मिलियन  से अधिक नहीं होगी ।  यानि की 17.5 मिलियन और बचे 22.5 मिलियन को केबल कनेक्शन नहीं हैं  और ये टी.वी.कार्यक्रम देखने के लिए पूर्णतः दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम पर आश्रित हैं ।  डी.टी.एच., डी.डी.डायरक्ट प्लस की प्रस्तुति ने केरल के डी.डी. दर्शकों की संख्या बढा दी है    प्राप्त सेट टाप बँक्स और रिसीवर की बिक्री अनुमान के अनुसार केरल राज्य के 3-4 लाख परिवारों के पास डी.टी.एच. है । 

विश्वव्यापी पहुँच दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम के कार्यक्रम केरल के प्रत्येक और सभी टी.वी. गृहस्थों में पहुँचती है ।  यह एक विशवव्यापी पहुँच है ।  टी.ए.एम. मीडिया अनुसंधान आँकडों के अनुसार मलयालम कार्यक्रम देश के सभी महानगरों और अन्य प्रदेशों में अच्छी तरह पहुँचती हैं    खाडी और पश्चिम के कुछ देश के दर्शक निरंतर अधिक कार्यक्रमों की माँग करते हैं 

 गुणात्मक कार्यक्रमदूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम द्वारा निर्मित एवं प्रसारित कार्यक्रमों के गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं    केरल में दूरदर्शन केन्द्र के मलयालम कार्यक्रमों को अपनी विषय वस्तु की स्तरीयता के लिए मानक के रूप में लिया गया है ।  सिनेमा और टी.वी.प्रोडेक्शन क्षेत्र के प्रमुख व्यवसायी दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम से जुडे़ हुए हैं ।  टेलिविजन उद्योग के निर्माण क्षेत्र, अभियांत्रिकी, संपादन, चलचित्रकला और समाचार-चयन आदि क्षेत्र के कुछ प्रतिभासंपन्न  व्यक्ति भी दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम से जुडे़ हुए हैं ।  कुछ अरसों से केन्द्र के कई पेशेवर लोगों को दूरदर्शन के देशीय दूरदर्शन पुरस्कार प्राप्त किए है ।  चालू वर्ष में भी, दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम  केपेशेवर व्यक्तियों ने उत्कृष्ट टी.वी.प्रोडेक्शन क्षमता के लिए अच्छे टेलीफिल्म, अच्छे निदेशक,  अच्छे संपादन, अच्छे चलचित्र निर्माण और अच्छे रूप सज्जा के लगभग सभी महत्वपूर्ण देशीय पुरस्कार जीता है । 

 जनता का चैनलःकेरल के आम आदमी के लिए दूरदर्शन शब्द टी.वी.का समानार्थक है ।  टी.वी.स्वामित्व के विविध अनुमानों के अनुसार केरल में केवल 40 प्रतिशत परिवारों को ही केबल कनेक्शन हैं और बचे 60 प्रतिशत परिवार दूरदर्शन केकार्यक्रम ही देखते हैं ।  केबल कनेक्शन वाले  70 प्रतिशत से अधिक लोग परिवार दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम के कार्यक्रम नियमित रूप से  देखते हैं ।  यह उपलब्धि विषय वस्तु की गुणवत्ता के कारण ही है ।  प्रति सप्ताह168 घण्टों के कार्यक्रम का निर्माण दूरदर्शन में ही होता है । 

मेगा धारावाहिक, मेगा हिटदूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम नियमित रूप से  सोमवार से शुक्रवार तक शाम 3 बजे से 5 बजे तक और शाम 7.30 बजे से 8 बजे तक मेगा धारावाहिकों का प्रसारण करते है ।  अन्य देशों के दर्शकों और दिनभर टी.वी. देख न सकनेवालों के लिए उपर्युक्त कार्यक्रम देर रात को फिर से प्रसारित किया जाता है ।  सूपर स्टार मम्मूटी द्वारा निर्मित मेगा धारावाहिक ज्वालयायी दो वर्षों से अधिक चलता आ रहा है जिसे उद्योग जगत का सूपर हिट मलयालम मेगा धारावाहिक माना जाता है ।  ज्वालयायी का दूसरा भाग जो अब प्रसारित हो रहा है, हिट हो चुका है ।  दर्शकों से लिए गए आंकडों के अनुसार अन्य मेगा धारावाहिक भी इससे पीछे नहीं है । 

वार्तकल 1985 में डी.डी. मलयालम समाचार वार्तकलकी शुरुआत से ही मलयाली दर्शकों के लिए, प्रस्तुति शैली और विषयवस्तु की स्पष्टता के कारण लत सा बन गया था ।  दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम ने समाचार के विद्यमान शाम 7 बजे तथा 5 बजे के स्लाँट के साथ साथ सुबह 7.30 बजे तथा दोपहरबाद 1 बजे को भी समाचार नए स्लाँट चालू किए हैं ।  देर से आरम्भ किए समाचार प्रसारण की पुनःसंरचना जारी है । 

सीधा प्रसारण (लाईव) कार्यक्रम दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम हर वर्ष केरल की संस्कृति और परंपरा से संबंधित कुछ प्रमुख कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण करता है ।  दूरदर्शन कलेण्डर का पहला सीधा प्रसारण कार्यक्रम शबरीमला से मकरविलक्कु का सीधा प्रसारण था ।  अब इसका प्रसारण, पूरे दक्षिण भारत में प्रादेशिक भाषा में कमेन्ट्री के साथ प्रसारित किया जाता है ।  टी.ए.एम.मीडिया अनुसंधान आँकड़ों के अनुसार दस लाख टी.वी.दर्शक यह  सीधा प्रसारण देखे हैं ।  संयोगवश, दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम को इस कार्यक्रम के लिए 2005 का दूरदर्शन राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हुआ ।  दूरदर्शन कलेण्डर का दूसरा सीधा प्रसारण भव्य सांस्कृतिक समारोह तृश्शूर पूरम है जिसका सीधा प्रसारण डी.डी. राष्ट्रीय  और डी.डी. भारत द्वारा किया गया है ।  हर वर्ष दुनिया भर के लाखों दर्शक यह कार्यक्रम देखते है ।  दूरदर्शन कलेण्डर का तीसरा सीधा प्रसारण आट्टुकाल पोंकाला है जिसमें लाखों स्त्रीयाँ भाग लेती हैं ।  दूरदर्शन कलेण्डर का अगला सीधा प्रसारण आलप्पी से नेहरू ट्राँफी नाव खेल है, जो कुट्टनाड़, जिसे केरल के चावल का टोकरी माना जाता है, का सांस्कृतिक त्योहार है ।  दूरदर्शनराष्ट्रीय और दूरदर्शन भारत, अंग्रेज़ी और हिंदी में कमेन्ट्री के साथ इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण करते है । दुनिया भर के लाखों लोग यह कार्यक्रम देखते है ।  अन्य महत्वपूर्ण नियमित रूप से होनेवाले सीधा प्रसारण कार्यक्रम हैं- वीट्टुविशेषम, कृषिदर्शन(शुक्रवार), निशागंधी   और   डी.डी. वीकेन्ड आँनलाईन,   संवादम एवं रोजाना समाचार बुलेटिन है । 

वीट्टुविशेषम यह एक बेजोढ कार्यक्रम है जो प्रदेश की जनता की सर्वागीण विकास पर लक्षित है ।  सार्वत्रिक प्रासंगिकता रखनेवाले स्वास्थ्य, विकास, महिलाओं, बच्चों, युवा एवं बुजुर्ग लोगों से संबंधित समस्याएं, जीवन बीमा, वित्त, धन, प्रबन्ध, रोजगार इत्यादि से संबंधित विषयों पर चर्चा होती है ।   लाईव फोन इन कार्यक्रमों में दूरदर्शन विषय से संबंध रखनेवाले विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों को चुनते हैं और समाज के सभी तरह के लोगों की शंकाओं का स्पष्टीकरण देते हैं ।  आकलन के अनुसार देश भर में यह कार्यक्रम काफी चर्चित है

 तीन स्तरीय सेवा दूरदर्शन में तीन स्तरीय प्राथमिक कार्यक्रम सेवा है राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय (नारोकास्ट) ।  नारोकास्ट का उद्देश्य नागरिकों और प्रदेशों के सर्वागीण तथा सुव्यवस्थित विकास करना है ।  प्रत्येक जो़न के लिए आर्थिक रूप से  पिछडे जो़न का विकास के कार्यक्रम दिए जाते हैं ।  नारोकास्ट कार्यक्रम का आधारभूत उद्देश्य शीघ्र  विकास करना है ।  कृषि ग्रामीण विकास तथा नारी एवं बच्चों से संबंधित समस्या, रोज़गार और परिवार कल्याण जैसे विषय लिया जाता है । 

कृषि दर्शन लोक सेवा प्रसारण और विकास संसूचना को मज़बूत करने के लिए प्रसार भारती का कृषि दर्शन और  नारोकास्टिंग बहुत प्रभावशाली रहा ।  इसकी शुरुआत 2 मई 2005 को हुआ जिसका साप्ताहिक प्रसारण सोमवार से शुक्रवार तक होता है ।  अभी केरल में नारोकास्ट कल्पट्टा, मंजेरी, मलपुरम, शोरनूर, पालघाट, त्रिश्शूर और इडुक्की में उपलब्ध है ।  कृषि दर्शन कार्यक्रमों में अनुसंधान निर्विष्ट, फीचर, किसानों की सफलता  की कहानियाँ, खेती-बारी पर  आधारित प्रशनोत्तरी कार्यक्रम, पैदावर संगोष्ठियाँ और लाईव प्रश्न उत्तर सत्र रखे जाते है।  इस प्रदेश में खेती की जानेवालेफसलों के साथ साथ सुव्यवस्थित कृषि, जल संचयन तथा कीट पालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को चर्चा में शामिल किए जाते हैं । 

कार्यक्रमों का संचयनदूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम हमेशा ही शिक्षा, सूचना और मनोरंजन प्रदान करने वाले मिश्रित कार्यक्रमों का प्रसारण में विशेष ध्यान रखते हैं ।  हाल ही के कार्यक्रमों के संयोजन के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत समय मनोरंजन के लिए और बचे 50 प्रतिशत शिक्षा और सूचना के लिए विभाजित है

 सार्वजनिक निजी भागीदारी1985 में शुरु करने के समय से ही दूरदर्शन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम सार्वजनिक निजी भागीदारी की नीति को अपनाया है ।  यह भागीदारी सौंपे गए तथा प्रायोजित कार्यक्रमों द्वारा ही बनाए रखा गया है ।  डी.डी. समाचार पूरे राज्य के समाचार को विस्तार रूप से और घटना विवरण सहित दर्शकों तक पहुँचाते हैं ।  नई प्रस्तुत कृषि दर्शन कार्यक्रमों के लिए अनेक विशेषज्ञों एवं कैमरा यूनिटों को सूचना इकट्ठा करने के लिए पूरे राज्य में तैनात किए गए दूरदर्शन जैसे किसी भी प्रसारण संगठन का भविष्य अभ्युदय हो रहे तकनीकी और दूरसंचार प्रणाली एवं प्रसारण की मी़डिया की केन्द्राभिमुखता के समन्वयन पर निर्भर रहेगा ।  डी.टी.एच., डी.डी.डायरेक्ट प्लस की प्रस्तुति इस लक्ष्य की ओर दूरदर्शन का पहला कदम है ।  बेतार दूरभाष प्रणाली और नेट सर्विस (सेवा) में शीघ्र प्रवेश ही अगला कदम होगा ।
 

 


 
 
   
     

 
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